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शिव स्तुति संस्कृत में | Shiv stuti in Sanskrit : पौराणिक पाठ

शिव स्तुति संस्कृत में केवल स्तुति का पाठ नहीं है, बल्कि यह उस प्राचीन परंपरा का विस्तार है जिसमें शब्द और चेतना एक साथ साधना करते हैं। संस्कृत में रचित शिव स्तुति पढ़ते समय ऐसा अनुभव होता है मानो साधक अपने भीतर ही शिव-तत्व से संवाद कर रहा हो। यहां आपके लिए Shiv stuti in Sanskrit दिया गया है-

Shiv stuti in Sanskrit

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं
गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं

महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम॥

महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं
विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं

सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्॥

गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं
गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं

भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्॥

शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले
महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप:

प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप॥

परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं
निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
यतो जायते पाल्यते येन विश्वं

तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्॥

न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न
चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो

न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड॥

अजं शाश्वतं कारणं कारणानां
शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं

प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम॥

नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते
नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य

नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्॥

प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ
महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे

त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:॥

शंभो महेश करुणामय शूलपाणे
गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि

पासि विदधासि महेश्वरोऽसि॥

त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे
त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश

लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन॥

यह पाठ भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। अनेक ग्रंथों में शिव स्तुति को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया गया है, जैसे कि शिव महिम्नस्तोत्र, शिव ताण्डव स्तोत्र, रुद्राष्टकम, और महामृत्युंजय मंत्र। इन सभी रूपों में, भगवान शिव की महिमा, उनकी शक्ति, और उनके भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। Shiv Stuti pdf को आप अपने मोबाइल में डाउनलोड भी कर सकते है।

Shiv Stuti in Sanskrit PDF

Shiv stuti PDF रूप उन साधकों के लिए उपयोगी माना जाता है जो पाठ को शुद्धता और निरंतरता के साथ पढ़ना चाहते हैं। संस्कृत लिपि में स्पष्ट रूप से लिखी गई स्तुति पाठक को शब्दों की संरचना और अर्थ के प्रति सजग बनाती है।

Shiv Stuti Image Download

एक ही Image में पूरी स्तुति प्रस्तुत करना साधना की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। जब संपूर्ण स्तुति एक ही दृष्टि में उपलब्ध होती है, तो मन बार-बार भटकता नहीं और पाठ की लय बनी रहती है। यह साधक को पाठ के दौरान एक स्थिर बिंदु प्रदान करती है, जिससे शब्दों के साथ-साथ उनका भाव भी भीतर उतरता है।

Shiv Stuti in Sanskrit Audio and Video

संस्कृत स्तुति का श्रवण पाठ से भिन्न अनुभव प्रदान करता है। Audio/ video के माध्यम से जब शिव स्तुति की ध्वनि वातावरण में फैलती है, तो उसका प्रभाव केवल कानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मन और श्वास की गति तक को प्रभावित करता है। ऑडियो को डाउनलोड करके आप Shiv Stuti Ringtone के रूप में भी उपयोग कर सकते है।

Shiv stuti Lyrics का नियमित सही विधि से किया गया पाठ साधक को बाहरी शोर से हटाकर भीतर की शांति की ओर ले जाता है। संस्कृत शब्दों की गंभीरता और शिव-भाव की स्थिरता मिलकर मन को संतुलित करती है। इसी निरंतर अभ्यास से इस पाठ के लाभ धीरे-धीरे जीवन के हर स्तर पर प्रकट होने लगते हैं।

FAQ

संस्कृत की ध्वनियाँ अर्थ के साथ ऊर्जा भी वहन करती हैं, जिससे पाठ का प्रभाव गहरा हो जाता है।

पाठ नियमित रूप से करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

पाठ करते समय व्यक्ति को पवित्रता और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। ध्यान लगाकर और भावनाओं के साथ पाठ करना चाहिए।

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